Thursday, January 9, 2020

जरा सोचो !

जिसको पूजते हो आज ईश्वर के मानी
जिसकी हर बात समझते हो ब्रह्म वाणी
जरा रुको और सोचो  -
उसको पूजते हुए और उसकी  हर बात मानते हुए
कहाँ तक आ गए हो और किन मूल्यों से बेगाने हुए


याद करो जब  किया था सफर का आगाज़
तब क्या बुलंद थे मंसूबे और क्या था अंदाज़
याद करो ,जरा याद करो -
" सबका साथ सबका विकास "
" बहुत हुई महंगाई की मार"
" बहुत हुआ नारी पर वार "
और जाने कितने ऐसे वादे जिनको पूरा होना था
 कितने वादे जिनसे जनता का असल सरोकार था

जाने कैसे सबकुछ भूलकर तुम अब भी  देते हो उसका साथ?
अब तो बच्चे भी समझ गए करना सिद्ध उसे बस अपना स्वार्थ
उसने झूठे दुश्मन गढ़ कर तुमको आपस में लड़ाया है
अरे, समझो उसने ही तो धर्म की आग को भड़काया है
हाल वो कर दिया देश का,सबको सड़कों पर लाया है
देश का किसान,मजदूर और छात्र सड़क पर आया है
और बात हुई एक शर्मनाक बहुत
कॉलेज में चली गोलियां और  गोले छूटे आँसू  गैस के
बोलो जरा क्या इसी दिन का वादा था ?


दिल पर रख कर हाथ ये कह दो क्या इसी दिन का वादा था?

Tuesday, January 7, 2020

नफ़रत का बीज

मैं जहालत और नफ़रत का बीज हूँ
मैं इस मुल्क के किये धरे पे पानी फेर दूंगा
मैं तुम्हारी बुद्धि और विवेक हर लूँगा
मैं इस मुल्क के किये धरे पे पानी फेर दूंगा।

मैं जो हूँ, पनपता हूँ वहां -
जहाँ भूख होती है और ग़ुरबत खूब होती है
जहाँ करुणा  मृत और ईर्ष्या  खूब  होती है
जहाँ तर्क की जगहंसाई और कुतर्क पर तालियां होती हैं
जहाँ धर्म, जात -पात, अमीर- गरीब की एक गहरी खाई होती है
ऐसा मुल्क मेरे पनपने के लिए उपजाऊ होता है
मुझे बस झूठ के सहारे लोगों को बाँटना और तोड़ना है।

फिर क्या ...........बस मेरा ही एकछत्र राज होगा
नया एक सविंधान और नया एक राष्ट्र होगा
सर झुकाये जो चलेंगे लीक पर वो खुशहाल रहेंगे
और जो पूछेंगे सवाल वो हमारी जेल भरेंगे।


पास में एक करुणा और प्रेम का बीज सब सुन रहा था
और सुनकर ये सब वो मंद मंद मुस्कुरा रहा था
कितने तानाशाहों ने ठीक यही सोचा ...... कितनी बार
पर  इतिहास  खंगालकर देखो हुई हमेशा उनकी हार
थोड़ी देर भले ही हो जाये --
प्रेम हमेशा जीतता है , मानवता हमेशा जीतती है
जब लोग एक दूसरे के लिए खड़े होते हैं
तो बड़े बड़े तानाशाहों के तख़्त पलट जाते हैं
अभी तुम देख नहीं पा रहे हो , तुम्हारे अंत की शुरुआत हो चुकी है
विश्वविद्यालयों से  निकलकर  बग़ावत अब सड़क तक आ चुकी है।


जैसे वो तानाशाह हारे थे तुम भी हारोगे।


(पाश की एक कविता से प्रेरित )